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जाधवपुर यूनिवर्सिटी बवाल पर टीएमसी और गर्वनर के ​बीच बढ़ा टकराव

जाधवपुर यूनिवर्सिटी बवाल पर टीएमसी और गर्वनर के ​बीच बढ़ा टकराव



केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने आरोप लगाया है​ कि गुरुवार को जाधवपुर विश्वविद्यालय में उनके साथ जो हुआ उसके लिए सीधे तौर पर वाइस चांसलर सुरंजन दास और पश्चिम बंगाल सरकार जिम्मेदार है.



  • 'जाधवपुर विश्वविद्यालय का पूरा घटनाक्रम पूर्वनियोजित था'
  • विश्वविद्यालय में केंद्रीय मंत्री सुप्रियो के साथ बदसलूकी की गई
केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने आरोप लगाया है​ कि गुरुवार को जाधवपुर विश्वविद्यालय में उनके साथ जो हुआ उसके लिए सीधे तौर पर वाइस चांसलर सुरंजन दास और पश्चिम बंगाल सरकार जिम्मेदार है. बाबुल सुप्रियो ने इंडिया टुडे से कहा कि पूरा घटनाक्रम 'पूर्वनियोजित' था.
गुरुवार को बाबुल सुप्रियो जाधवपुर विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे जहां पर कुछ छात्रों ने उनका विरोध किया था. सुप्रियो का आरोप है कि उनके साथ बदसलूकी की गई.
जो हुआ वह पूर्वनियोजित था
सुप्रियो ने कहा, “मैंने व्हाट्सएप पर मैसेज देखा जो अब सोशल मीडिया पर वायरल है, उससे पता चलता है कि जो हुआ वह सब पूर्वनियोजित था. मुझे पीटा गया, लात से मारा गया और प्रताड़ित किया गया लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. वाइस चांसलर ने यह कहते हुए खुद को इससे अलग कर लिया है कि 2014 में यहां एक घटना घटी थी, उसी आधार पर वे कैंपस में पुलिस नहीं बुलाएंगे.”
केंद्रीय मंत्री सुप्रियो का दावा है कि “वाइस चांसलर को पहले से पता था कि वहां पर बवाल हो सकता है, लेकिन उन्होंने स्थिति को अपने नियंत्रण में नहीं लिया.”
इस घटना के बाद वाइस चांसलर सुरंजन दास को घबराहट और हाइपरटेंशन की शिकायत के चलते एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
राज्यपाल ने लिया संज्ञान
जिस वक्त बवाल हुआ, राज्यपाल जगदीप धनखड़ भी वहां मौजूद थे और वे ही सुप्रियो को वहां से निकाल कर ले गए थे. उन्होंने इस घटना में वाइस चांसलर की भूमिका को गंभीरता से लिया है. राजभवन से जारी एक बयान में कहा गया है, “विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर की तरफ से गंभीर चूक हुई है. उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वाह नहीं किया. राज्य पुलिस प्रशासन भी राज्यपाल को सुरक्षा देने में स्पष्ट रूप से विफल रहा. राज्यपाल ने इसका संज्ञान लिया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है.”

आरोप-प्रत्यारोप जारी
बंगाल में सत्तारूढ़ टीएमसी ने राज्यपाल पर हमला बोला है. टीएमसी का कहना है कि राज्यपाल ने सुप्रियो को बचाने इसलिए पहुंचे क्योंकि सुप्रियो बीजेपी के नेता हैं. शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने दावा किया कि “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्यपाल जो कानून व्यवस्था के रक्षक हैं, चुनी हुई सरकार को सूचित किए बगैर जाधवपुर विश्वविद्यालय में एक बीजेपी नेता का कथित बचाव करने पहुंच गए. बीजेपी नेता बाबुल सुप्रियो वहां एबीवीपी के एक कार्यक्रम में गए थे. वे भी प्रशासन को सूचित किए बगैर वहां गए थे.”
इसपर पलटवार करते हुए राज्यपाल धनखड़ ने कहा कि चटर्जी को अधूरी जानकारी है. राजभवन से जारी बयान में कहा गया है कि “राज्यपाल को अपनी जिम्मेदारी का एहसास है कि वे संविधान कानून और जनता के प्रति जवाबदेह हैं. राज्य के गवर्नर और विश्वविद्यालय के चांसलर की हैसियत से उनको यह एहसास था कि विश्वविद्यालय का दौरा करने से पहले सभी एजेंसियों को इस बारे में सूचित किया जाए. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि तृणमूल कांग्रेस के महासचिव कह रहे हैं कि राज्यपाल के दौरे के बारे में सरकार को सूचित नहीं किया गया. उन्हें पता ही नहीं है कि राज्यपाल ने डीजीपी के अलावा मुख्यमंत्री तक से बात की थी.”
ममता सरकार के एक और मंत्री साधन पांडे ने राज्यपाल पर तंज करते हुए कहा, “हमें यह देखकर बेहद खुशी हो रही है कि राज्यपाल इतने ​सक्रिय हैं. बाबुल सुप्रियो वहां एक मंत्री की हैसियत से नहीं, सिंगर की हैसियत से गए थे. राज्यपाल वहां एक सिं​गर का बचाव करने पहुंच गए. इससे पूरे गायक समुदाय में यह संदेश गया है कि उनपर कोई संकट आएगा​ तो राज्यपाल खुद जाकर उन्हें बचा लेंगे.”
इसी बीच बंगाल बीजेपी ने कोलकाता में मार्च निकालकर वाइस चांसलर सुरंजन दास के इस्तीफे की मांग की. कार्यक्रम का आयोजन करने वाली एबीवीपी ने भी शहर मे प्रदर्शन किया. दूसरी तरफ जाधवपुर विश्वविद्यालय में पूरी फैकल्टी से तमाम छात्र एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन किया. उनका कहना था कि वे 'बीजेपी और आरएसएस के फासीवादी षडयंत्र' से लड़ेंगे.

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